धूमधाम से मनाया गया बलभद्र पूजा, ब्याहुत समाज मे बताया बलभद्र है कुल देवता।

प्रतिनिधि मंडल (सुपौल)

मुख्यालय स्थित एक प्राइवेट स्कूल परिसर में रविवार को व्याहूत कलवार समाज के कुल देवता भगवान बलभद्र का पुजनोत्सव उमंग व उत्साह के साथ मनाया गया. इस अवसर पर श्री बलभद्र की प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान पूर्वक पुजन किया गया. पुजन पश्चात पुष्पांजलि व आरती की गई जिसमे सैकडों स्वजातीय सामिल हुए. तत्पश्चात मंत्र्योचारण के बीच पांच जनों के द्वारा बलभद्र भगवान को विविध व्ययंजनों का महाभोग लगाया गया. विद्वान पुजारी कुलानंद झा के सानिध्य में रंजन भगत दंपति ने यजमान के तौर पर पुजन संपन्न कराया. व्याहूत कलवार समाज सह बलभद्र पुजा समिति छातापुर के अध्यक्ष पंकज कुमार भगत सहित कमेटी के सदस्य व यूवा पुरे तत्परता के साथ आयोजन को सफल बनाने में जूटे हुए थे. इस अवसर पर संकल्प इंटरनेशनल स्कूल के द्वारा सम्मान समारोह आयोजित कर समाज के वृद्धजन, यूवा समाजसेवी एवं धार्मिक व अध्यात्मिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान व उपलब्धि के लिए लोगों को फुलमाला, स्मृति चिन्ह, पाग, शाॅल से सम्मानित किया गया. वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद बीडीओ डा राकेश गुप्ता एवं थानाध्यक्ष प्रमोद झा भी सम्मानित किये गए. पुजनोत्सव में प्रखंड क्षेत्र के सैकड़ो स्वजातीय लोग सामिल हुए, भीमपुर, ठूंठी, जीवछपुर, भागवतपुर, महद्दीपुर, रामपुर, कैनजारा, ग्वालपाडा, मोहनपुर तमुआ चौक सहित आसपास के प्रखंड के लोगों ने भी हिस्सा लिया. जिसमे खासकर बच्चों और महिलाओं के बीच खासा उत्साह दिख रहा था. आयोजन के मौके पर कच्ची रसोई महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया जिसमे सैकड़ो लोगों ने महा प्रसाद ग्रहण किया. मौके पर मौजूद आदि की मानें तो व्याहूत समाज सदियों से बलभद्र भगवान को कुल देवता के रूप में पुजते आये हैं. छातापुर में विगत एक दशक से व्याहूत समाज के लोग बलभद्र पुजनोत्सव बडे ही धूमधाम से मनाते हैं, कहा गया कि राजनैतिक व समाजिक भागीदारी के लिए व्याहूत कलवार समाज की एकजुटता खासकर शैक्षणिक व आर्थिक उन्नति के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है,

पुजनोत्सव को सफल बनाने में व्याहूत समाज के अध्यक्ष गौरीशंकर भगत, बलभद्र पुजा समिति के अध्यक्ष पंकज कुमार भगत, कोषाध्यक्ष बिनोद कुमार भगत, उपाध्यक्ष अमित भगत, सचिव रवि भगत, प्रदीप भगत, अशोक भगत, जयकुमार भगत, प्रदीप भगत, शशिभूषण पप्पु, सुरज चंद्र प्रकाश, संजीव भगत एवं संजय भगत का सराहनीय योगदान रहा, कार्यक्रम में जगदीश भगत, अरुण भगत, प्रमोद भगत, अरुण भगत, मनोज भगत, सुकदेव भगत, गोपाल प्रसाद भगत, राजकुमार भगत, शिवकुमार भगत, अमरजीत कुमार, रमेश भगत, राजकुमार भगत राजु, सुधांशु भगत, निरंजन भगत, गुड्डू भगत, अनिल भगत, सुरेश भगत, मंटू भगत, गुंजन भगत, खोखा भगत, अमित बौआ, बबलु भगत, सहित बड़ी संख्या में व्याहुत समाज के लोग मौजूद थे, विंदेश्वरी भगत, अरविंद भगत, ओमप्रकाश भगत, मनीष भगत मुख्य रूप से थे

श्रीकृष्ण जी विष्णु तो बलरामजी शेषावतार थे. दोनों की मातायें अलग पर पिता बासुदेव ही थे

मान्यता है कि जब कंस ने देवकी व वासुदेव के छह पुत्रों को एक एक कर मार डाला तो देवकी के गर्भ मे शेषावतार भगवान बलराम जी पधारे. योगमाया ने उन्हें आकर्षित करके नंद बाबा के यहां निवास कर रही रोहिणी के गर्भ मे पहूंचा दिया. जबकि विष्णु अवतार श्री कृष्ण जी देवकी के आठवें पुत्र के रूप में प्रगट हुए. भले ही श्री कृष्ण व बलराम जी कि मातायें अलग अलग थी परंतु पिता वासुदेव ही हैं. बलभद्र भगवान को कई नामों से जाना जाता है. बलराम, दाऊ, बलदाऊ, हलधर, संकर्षण आदि प्रमुख हैं, बलवानों मे श्रेष्ठ रहने के कारण उन्हे बलभद्र कहा जाता है. द्वापर युग मे श्रीकृष्ण विष्णु अवतार तो बलभद्रजी ( बलराम) शेषावतार थे. त्रेता यूग में ठीक इसके उलट हुआ. वह इसलिए कि त्रेता में विष्णु अवतार श्रीराम बडे भाई हुए और लक्ष्मणजी शेषावतार छोटे भाई के रूप में थे. बलराम जी बडे भाई रहने के कारण श्रीकृष्ण जी उन्हें दाऊजी कहकर संबोधित करते थे. धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक कि विष्णु भगवान के साथ शेषनाग हमेशा ही साये की तरह साथ साथ रहते हैं. बलभद्र जी का विवाह रेवती से हुआ था. इनके नाम से मथूरा मे दाऊजी का प्रसिद्ध मंदिर भी है. वे गदा धारण करते हैं. बलराम जी ने ही भीम व दूर्योधन दोनों को गदा सिखलाई थी

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