बदलते मौसम की मार से जिले वासी हो रहे हलकान

मौषमी बीमारियों से बचाव को लेकर खानपान एवं रहन-सहन पर देना होगा ध्यान: डॉ उमेश कुमार
सिमराही सुपौल ।

रिपोर्ट/ब्रजेश कुमार सिमराही राघोपुर

बदलते मौसम में शिशुओं की ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। क्योंकि नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान अच्छे ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाते है, तो उन्हें बहुत जल्दी सर्दी या गर्मी लग सकती है। लेकिन ध्यान रहे कि चाहे कोई भी मौसम हो जरूरी यह है कि आप सोते समय शिशु के शरीर का तापमान न बढ़ने दें। दिन में तेज धूप और रात को पड़ रही हल्की ठंड लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। डॉ उमेश कुमार के अनुसार मौसम को लेकर लापरवाही बरतने वाले लोग ज्यादातर बीमार पड़ रहे हैं। हालांकि सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों को हो रही है। जिस कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अक्टूबर माह खत्म होने को है और ठंड दस्तक देना शुरू कर दिया है। बदलते मौसम में बच्चे एवं बुजुर्गों का उचित देखभाल नहीं होने से बहुत ही जल्द खांसी, जुकाम की चपेट में आ जाते हैं।

इसीलिए बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जिन लोगों को सर्दी, खांसी, जुकाम या बुखार जैसी बीमारियां बहुत ही जल्द हो जाती हैं। उनका रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए दिन में एक या दो बार ग्रीन या ब्लैक टी का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा विटामिन डी और सी युक्त पदार्थ जैसे- नींबू और आंवले का सेवन जरूर करना चाहिए।

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