सैफगंज के मजदूर की पंजाब में मौत लोगो ने कहा रोटी की खातिर कब तक परदेश में मरते रहेंगे बिहारी

दिवाकर कुमार , अररिया


फ़ारबिसगंज : सैफगंज के रहने वाले आदिवासी समुदाय के युवक सोनेलाल बेसरा की पंजाब में संदेहास्पद अवस्था मे मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार युवक का शव पंजाब के लुधियाना जिले अंतर्गत सुलरा थाना क्षेत्र अन्तर्गत मिला था। घटना की जानकारी परिजनों को दो दिन बाद मिली। मृत युवक सोनेलाल बेसरा पिता-मंगलू बेसरा वार्ड 10 सैफगंज का रहने वाला था।

ग्रामीणों ने बताया कि सोनेलाल पंजाब में रहकर मजदूरी का काम किया करता था कुछ माह पूर्व उसके साथ गांव के ही रहने वाले छोटू मण्डल पिता-महेंद्र मण्डल के साथ सोनेलाल बेसरा मजदूरी के लिए पंजाब गया हुआ था। इसी बीच मौत की खबर आई मोत किस वजय से हुआ इसका पता नहीं चला है। युवाओ व स्थानीय ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर एम्बुलेंस से शव लाने के लिए भेजा गया। वही युवा प्रभात ठाकुर ने बताया कि इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पॉपुलेशन स्टडीज मुताबिक बिहार की आधी जनसंख्या का पयालन से सीधा संबंध है ।इसका सबसे कारण है बिहार में किसी भी बड़े उद्योग का नही होना , कृषि के क्षेत्र में नवीन तकनीक अभाव ।अगर बिहार सरकार अब तक भी पलायन के विषय में नही सोचे तो इसी तरह बिहार के मजदूर बाहर जाएंगे काम करने और इसी तरह मौत का तांडव होता रहेगा ।

वही ग्रामीण अमित सिंह ने भी कहा
गौरवशाली इतिहास वाला राज्य बिहार आज देश में मज़दूरों का गढ के रूप में जाना जाने लगा वजह बेरोज़गारी, अशिक्षा और कुर्सीमोह राजनीति जिसमें नेता सिर्फ कुर्सी को बचाने के जुगत में लगे हैं चाहे बिहार बर्बाद हो या बिहारी परदेश में मरें या गाली सुनें इन्हें कोई फर्क नहीं पडता ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है हम बिहारियों के लिऐ परदेश में जबभी कोई बिहारी मरता है तो आत्मा रोती है लेकिन आम आदमी के हाथ में है ही क्या बांकी एक बिहारी होने के नाते जितना अपने बस में होगा पलायन रोकुंगा आज के तिथि में 6 लोगों को रोजगार दिया हुँ और प्रयासरत हुँ जितना बस में होगा उतना पलायन रोकुंगा हालाँकि मेरा प्रयास बहुयात पलायन के अनुसार बहुत तुच्छ है लेकिन जितना सामर्थ्य है उतना पलायन रोकने का प्रयास करता रहुँगा सरकार से अनुरोध है कृपया कोई जरूर कदम उठाऐं और इंफ्रास्ट्रक्चर को बल देने के लिऐ कम्पनियों को आमंत्रित करे मृतक के पुरजनों को ईश्वर दुख सहने कि शक्ति दें।

वही मनीष साह ने कहा ऐसा नहीं है कि राज्य के बाहर कामगारों की मौत की यह पहली घटना है. दूसरे प्रदेशों में बिहारी मजदूरों की मौत की खबरें अक्सर आती हैं. हर ऐसी घटना के बाद गम जताया जाता है और मुआवजे का एलान होता है. एक-दो दिन सोशल मीडिया पर शोक संदेश तैरते हैं. धीरे-धीरे इन मजदूरों की मौत की असली वजह बेरोजगारी और पलायन को भुला दिया जाता है. कुछ दिनों बाद फिर ऐसी ही घटना होती है और फिर शोक और मुआवजे का सिलसिला शुरू हो जाता है. आखिर बिहार के कामगार रोजी-रोटी की खातिर परदेश में कब तक मरते रहेंगे? क्या यही इनकी नियति बन गई है। इससे पहले भी इसी गांव दो मजदूर की मौत पहले अन्य प्रदेशों में हो चुकी है।

वही घटना की जानकारी मिलते ही मुखिया दिलीप पासवान, सरपंच रामानंद पासवान,वार्ड सदस्य अनिल उरांव,समाज सेवी मनीष साह, शिवशंकर सिंह,सूरज भगत,राजेन्द्र किस्कू सहित अन्य ने पहुँच कर परिजनो को सांत्वना दिया।

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