दुर्गा मंदिर में 11 कन्या सहित 1 बटुक को भोजन करवाया गया।।
अमृत सागर झा,बलुआ बाजार
चैत्र नवरात्रि 9 दिनों का पर्व है,जिस दौरान मां दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। भारतीय संस्कृति में कन्याओं को दुर्गा का रूप माना जाता है। नवरात्रि व्रत को बिना कन्या पूजन के पूर्ण नहीं माना जाता है। ऐसे में छातापुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मीनियाँ पंचायत स्थित दुर्गा मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर अष्टमी के दिन मंदिर परिसर में 11 कन्या सहित 1 बटुक को दुर्गापुर आयोजन समिति की ओर से भोजन करवाया गया। कन्याओं को भोजन करवाने से पहले खीर, पूरी, हलवा का भोग दुर्गा मंदिर में लगाया गया। जिसके बाद सभी कन्याओं सही बटुक का पांव धोकर मंदिर परिसर में पहुंचे, जहां मंदिर के पुजारी जोगानंद झा,सोनू मिश्रा, मिंटू मिश्रा एवं अन्य लोगों द्वारा सभी कन्याओं को भरपेट भोजन कराया गया। जिसके बाद उपस्थित सभी कन्याओं को टीका लगाकर दक्षिणा दिया गया। वही कन्याओं को विदा करते वक्त सभी ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मंदिर के पंडित श्री ललित नारायण झा बताते हैं कि कन्या पूजन नवरात्र के किसी भी दिन कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग अष्टमी और नवमी तिथि को पूजन के लिए श्रेष्ठ दिन मानते हैं। माता रानी का स्वरूप माने जाने वाली कन्याओं की पूजा के बिना नौ दिन की शक्ति पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि मां हवन, तप और दान से इतनी प्रसन्न नहीं होती, जितनी कन्या पूजन से होती हैं। कुछ लोग उपवास के अंतिम दिन यानी नवमी तिथि को कन्या पूजन करने का संकल्प लेते हैं और कन्या भोज के बाद ही नवरात्र समापन हो जाते हैं।कन्या पूजन के दौरान ध्यान रखें कि कन्याओं की उम्र दो से 10 साल की उम्र के बीच होनी चाहिए। इसके साथ ही एक बालक को जरूर आमंत्रित करें क्योंकि यह बालक बटुक भैरव और लागूंरा का रूप माना जाता है। आदि शक्ति की सेवा और सुरक्षा के लिए भगवान शिव ने हर शक्तिपीठ के साथ-साथ एक-एक भैरव को रखा हुआ है इसलिए देवी के साथ इनकी पूजा भी जरूरी मानी गई है।

