मनरेगा योजना की पहल पर पंचायत में मिला मजदूरों को रोजगार, लगभग 120 परिवारों में खुशी।

सोनू आलम , भीमपुर, सुपौल

प्रखंड क्षेत्र के लक्ष्मीनियाँ पंचायत के वार्ड 09 स्थित मिरचैया नदी के कारण मुहाने पर बसे गांव को अपने आगोश में लेने लगा है। जिसके कारण गाँव के अधिकांश लोग इसके धारा से प्रभावित हैं। इसी को देखते हुए मनरेगा योजना के तहत फ्लूड प्रोटेक्शन बाढ़ सुरक्षा हेतु नदी का चिरान कर उसके धारा को प्रवर्तित करने का काम किया जा रहा है। जिसमें क्षेत्र के दैनिक मजदूरी करने वाले लगभग 120 लोगों को रोजगार दिया गया है। मेट के रूप में जागेश्वर सिंह व अनिल कुमार राय के देख रेख और रोजगार सेवक कुंदन कुमार के नेतृत्व में कार्यों में रोजगार मिलने से कई परिवार खुश नजर आ रहे हैं। कार्य कर रहे मजदूरों का कहना है कि पिछले वर्षों से कोरोनाकाल और लॉक डाउन के चलते अधिकतर लोगों का रोजगार छीन गया है। जिसके कारण लोगों को मजदूरी नहीं मिल रही थी। लेकिन मनरेगा विभाग के द्वारा इस संकट के घड़ी में रोजगार देने से दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को जीने का एक सहारा मिल गया है। लिहाजा, कार्यों का जायजा लेने पहुंचे पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि रौशन झा ने स्थल जांच के बाद मजदूरों का हौसला बढ़ाया और सरकारी निर्देश का अनुपालन करते हुए कार्य करने को कहा।

मजदूरी नहीं मिलने से अधिकांश परिवारों के बीच भुखमरी की स्थिति बन जाती।
इधर, पंचायत के लोगों ने कहा कि मनरेगा विभाग की ओर से लोगों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता तो कई परिवारों के बीच भुखमरी के स्थिति उत्पन्न हो जाती। लोगों ने कहा कि मनरेगा योजना के कारण ही आज इस महामारी में भी इस तरह की योजना का सृजन किया गया है। जिससे सैकड़ों लोगों को रोजगार उपलब्ध हो पाया। कहा कि इस योजना के तहत इससे पूर्व में भी पिछले वर्ष लॉक डाउन में मजदूरों को रोगार बन्द होने के बाद इस योजना के तहत रोजगार मुहैया कराया गया था। जिसके चलते लोग गांव में ही रोजगार कर घर का देख रेख करते थे। मजदूरों ने कहा कि इस महामारी में जहां हर तरफ सारा कामकाज ठप्प पड़ा है और लोगों के रोजगार छूट रहे हैं। ऐसी स्थिति में मनरेगा योजना से रोजगार मिलना एक सराहनीय कदम है। मौके पर पीआरएस कुंदन कुमार ने बताया कि नदी चिरान कार्य फिलहाल नौ सौ फीट किया जा रहा है। जिस कार्य में करीब 120 दैनिक मजदूर को उसके घर पर ही रोजगार उपलब्ध कराया गया है। जिस कारण मजदूर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्य को पूरा करने के बाद बांकी का चिरान कार्य किया जाएगा।

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