आलीशान बनने जा रहा रेफरल अस्पताल में नही है काम का नामोनिशान”

रिपोर्ट विकास आंनद के साथ ब्रजेश कुमार सिमराही राघोपुर


रेफरल अस्पताल राघोपुर में बन रहे 50 बेड का अस्पताल जहां घटिया सामग्री से कर रहे निर्माण जनता आक्रोश ,

सुपौल जिले में नामी गिरामी अस्पतालों में शुमार राघोपुर रेफरल अस्पताल परिसर अंतर्गत बन रहे नए 50 बेड के अस्पताल भवन निर्माण में उठा अनियमितता का मामला जोरोशोर से बढ़ता जा रहा है। इस नए अस्पताल भवन निर्माण को लेकर बुधवार को स्थानीय लोगों ने कार्य स्थल पर पहुचकर घटिया सामग्री से हो रहे निर्माण कार्य पर रोक लगा दिया। लोगों ने कहा जब तक निर्माण स्थल पर सूचना पट्ट नहीं लगाया जाएगा यह घटिया निर्माण बंद रहेगा।

मामले को लेकर जानकारी देते स्थानीय लोगों ने बताया कि सिमराही स्थित रेफरल अस्पताल राघोपुर में काफी दिनों से भवन के अभाव में मरीजों और अस्पताल प्रबंधन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिसे लेकर विभाग के द्वारा उक्त अस्पताल परिसर में 50 बेड का भवन तैयार करने का योजना दिया गया है। लेकिन उक्त भवन निर्माण के शुरुआत में ही संवेदक द्वारा भारी मात्रा में अनियमितता बरती जा रही है। लोगों ने बताया कि संवेदक द्वारा निर्माण कार्य में खुलेआम लोकल उजला बालू और घटिया किस्म का ईंट का प्रयोग किया जा रहा है। जिसके कारण निर्माण से पहले ही यहां लूट खसोट का दौर शुरू हो चुका है। स्थानीय लोगों ने बुधवार को कार्यस्थल पर पहुंचकर जब देखा कि बिना किसी प्राकलन और योजना का सूचना पट्ट के बिना ही कार्य करवाया जा रहा है तो लोग आक्रोशित हो उठे और कार्य को बंद करवा दिया।

लोगों ने बताया कि जब वहां मौजूद मुंशी से बिना सूचना पट्ट का घटिया निर्माण के बारे में पूछा गया तो मुंशी द्वारा बताया गया कि किसी नवीन सिंह द्वारा यह कार्य करवाया जा रहा है। और वही कुछ बता सकते है। वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि इस तरह के घटिया निर्माण कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। कहा कि अस्पताल सार्वजनिक है। और इससे इस क्षेत्र के लाखों लोग इलाज करवाने आने रहते हैं,बड़ी मुश्किल से इस क्षेत्र को 50बेड का अस्पताल का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। और इससे खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
वही संवेदक के मुंसी राधेश्याम झा ने बताया कि जिस मेटेरियल से निर्माण हो रहा है। सबके सामने है। बताया कि संवेदक ही कुछ बता सकते है। फिलहाल स्थानीय लोगों की माँग है कि निर्माण कार्य बंद हो और वरीय अधिकारियों की जाँच के बाद ही निर्माण सही तरीके से किया जाए।

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