सड़क दुर्घटना में मौत मामले में एक युवक की जान की कीमत पंचों ने लगाया तीन कट्ठा जमीन, मामला रफा दफा।।

रिपोर्ट:- अमृत सागर झा, बलुआ बाजार

छतापुर : प्रखंड क्षेत्र के जीवछपुर वार्ड 02 में ट्रैक्टर के कुचलने से 20 वर्षीय युवक विकाश पासवान जख्मी हो गया था। जिसका इलाज के दौरान विराटनगर हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। हैरानी की बात यह रही कि एक घंटे तक चले घटनाक्रम के बीच 12 किलोमीटर दूर से एक भी पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंची। लेकिन घटना के तीन दिन बीतने के बाद भी घटना के संदर्भ में स्थानीय थाना को सूचित नहीं किया गया। लिहाजा, उसके बाद घटना के संदर्भ में स्थानीय पुलिस भी छानबीन करना मुनासिब नहीं समझा। वही घटना के समय ट्रैक्टर जगन साह का पुत्र रमेश साह चला रहा था, जो नशे की हालत में था। वहीं घटना के बाद आनन फानन में ट्रैक्टर को रमेश साह का भाई श्याम साह ने अपने एक रिश्तेदार के घर छुपा दिया था। जहां से पता करने पर ट्रैक्टर गायब पाया गया है। थ्रेसर का काम कर लौटने के क्रम में घटना घटी थी। इधर, मामले में विगत दो दिनों तक शव लाने की खेल चलता रहा। आखिरकार तीसरे दिन शाम शव को परिजन को सौंपा गया।
आलम यह रहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के खींचातानी में मृतक के परिजन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बहरहाल, लंबे अंतराल के बाद बीती रात मृतक का शव परिजनों को सौंपा गया। शव के आते ही कुछ लोगों के द्वारा इस मामले को रफा दफा करने की बात भी आम होने लगी और परिजनों को समाजिक स्तर पर सुलह करने की बात होने लगी। इस बीच पंचायत प्रतिनिधियों के द्वारा शुक्रवार की सुबह पंचायती का समय रखा गया। जहां दूर दराज से पांचों को बुलाकर मामले की पंचायत होने लगी। पिछले 3 घंटों के लंबे विचार विमर्श के बाद पांचों के द्वारा अंतिम फैसला सामने आया। जहां पंचायत में एक जान की कीमत तीन कट्ठा जमीन लगाया गया। बताया जा रहा है कि जो जमीन पीड़ित परिजन को दिया गया , वह तीन कट्ठा जमीन ट्रैक्टर मालिक के घर से सटा हुआ है। गौरतलब हो कि बीते 8 नवंबर को थ्रेसर पर मजदूरी कर ट्रैक्टर से विकास पासवान घर लौट रहा था। उसी क्रम में ट्रैक्टर से गिरने के कारण चक्के के नीचे आने से कुचल गया। जिससे युवक गंभीर रूप से जख्मी हो गया।

घटना के बाद से ही मामले को रफा दफा करने में जुटे थे लोग।

सूत्रों की माने तो घटना के बाद से ही कुछ लोग मामले को रफा दफा करने में जुट गए थे। इसमें कुछ पंचायत प्रतिनिधि भी शामिल थे। उनके इशारे पर ही घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई। सूत्रों के अनुसार परिजनों को कुछ प्रतिनिधि के द्वारा पुलिस को सूचना देने से मना कर दिया और ये कहकर टालते रहे कि मामले का निपटारा बैठकर हो जाएगा। यही नहीं मृतक के शव को हॉस्पिटल से लाने में भी आनाकानी हो रही थी। इसी कारणवश मृतक को शव को लाने में 72 घंटे का समय लग गया।

पुलिस कार्रवाई के बजाय आवेदन देने के करती रही इंतेजार, पंचायत में मामला हुआ रफा दफा।

इधर, इस घटना के बाद अटकलें लगाई जा रही थी कि पुलिस घटना के तप्तीस में जुटेगी। लेकिन पुलिस घटना के संबंध में हस्तक्षेप करना भी मुनासिब नहीं समझा। घटना के तीन दिन होने के बाद भी पुलिस की तरफ से किसी प्रकार की कार्रवाई सामने नहीं आई। भीमपुर थानाध्यक्ष रामा शंकर ने पूछने पर ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि मामले को लेकर परिजनों के द्वारा सूचना नहीं दी गई और न ही किसी प्रकार का आवेदन दिया गया। अब सवाल उठता है कि पुलिस किसी भी घटना की छानबीन आवेदन देने के बाद ही शुरू करेगी। लिहाजा, शुक्रवार को पंचायत स्तर से मामले को रफा दफा कर दिया गया।

घटना को लेकर पीड़ित परिजनों द्वारा सूचना या आवेदन नहीं दिया गया है, जिसके आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी।

इधर इस संदर्भ में जानकारी देते हुए त्रिवेणीगंज डीएसपी ने बताया कि पुलिस को इस मामले में किसी प्रकार की सूचना नहीं है। वही पीड़ित परिवार के तरफ से किसी प्रकार का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है, जिस आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी।
– विपिन कुमार, डीएसपी त्रिवेणीगंज।

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