जेएलएनएमसीएच के अधिकारियों से एंबुलेंस के लिए कई दिनों से गुहार लगा रही बाराहाट मेहरमा की रहने वाली सुनीता ।

श्यामानंद सिंह, भागलपुर।

भागलपुर,सरकार के बदहाली का आईना अगर देखना हो तो आ जाइए सीधे मायागंज अस्पताल, जहां सरकारी सिस्टम की कमर टूट चुकी है, यहां बेबस और लाचार विकलांग महिला दर दर की ठोकर खा रही है परंतु कोई सुनने वाला नहीं।

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल मायागंज में महगामा के मेहरमा प्रखण्ड की रहने वाली सुनीता देवी एंबुलेंस के लिए चक्कर काटते दिख रही है। बताते चलें कि सुनीता देवी महागामा गोड्डा के मेहरमा प्रखंड की रहने वाली हैं और वह 80% विकलांग है, पैर से लाचार होने के चलते खुद से आना-जाना करना उनके लिए काफी कठिनाइयों भरा सफ़र रहता है, वह बच्चे को जन्म देने के लिए मायागंज अस्पताल में 22 दिसंबर को भर्ती हुई, पहले वह महगामा गोड्डा सदर अस्पताल एंबुलेंस से गई थी, फिर भागलपुर मायागंज अस्पताल आई ,यहां सीजरल तरीके से बच्चे को जन्म दी, परंतु बच्चा जीवित न रह सका। अब वह नम आखों से घर लौटना चाह रही है तो उसे जेएलएनएमसीएच अस्पताल मायागंज की ओर से कोई एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल रही है।

मीडिया से बात करते हुए सुनीता ने कहा की मैं 80% पैर से विकलांग हूं, मैं सदर अस्पताल महागामा गोड्डा से एंबुलेंस से आई परंतु यहां से मुझे घर जाने के लिए कोई सुविधा नहीं दी जा रही है, मैं कई दिनों से परेशान हूं, लाचार बेबस वह महिला फफक कर रोने लगी । उस महिला ने कहा मुझे घर तक पहुंचने के लिए कोई भी उपाय यहां से नहीं मिल रहा।

अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार की यही व्यवस्था है, एक लाचार, बेबस, विकलांग महिला अपने घर तक जाने के लिए एंबुलेंस के लिए गुहार लगा रही है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं, आखिर सरकार की ऐसी लचर व्यवस्था क्यों?

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