आध्यात्मिकता की ओर चलिए,सदयुक्ति से होते हैं ईश्वर के दर्शन:महर्षि मेंहीँ
सुरेश कुमार सिंह सिमराही राघोपुर सुपौल

महर्षि मेंहीँ आश्रम वार्ड नंबर 03 नगर पंचायत सिमराही परमेश्वरी सिंह यादव टोला मे आज सत्संग प्रेमियों एवं धर्म प्रेमियों द्वारा सोभा यात्रा निकाल कर सत्संग एवं भंडारा का कार्य कर्म किया गया ! जमीन दाता एवं आयोजन कर्ता नगर पंचायत सिमराही चेयरमैन प्रतिनिधि श्री विजय चौधरी के द्वारा किया गया इस मौके पर जाप के प्रदेश उपाध्यक्ष परमेश्वरी सिंह यादव व्यापार मंडल के अध्यक्ष ललित जायसवाल समाजसेवी राधे भगत वार्ड पार्षद प्रतिनिधि विनय भगत वार्ड तीन के पार्षद सतीश कुमार मुनेश्वर यादव योगेश्वर यादव नीतीश कुमार महेश्वरी यादव सतनारायण यादव कमलेश्वरी यादव देव नारायण यादव शंभू यादव बिंदेश्वरी यादव सुरेंद्र यादव भुवनेश्वर प्रसाद यादव अरविंद यादव शैलेंद्र यादव संजय कुमार नरेश कुमार अजय कुमार नीतीश कुमार वीरेंद्र यादव कुलानंद यादव राम पुकार यादव उपे यादव पवन कुमार संजय कुमार जय प्रकाश यादव नागो यादव महाप्रकाश यादव

संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की 139वीं जयंती पर विशेष
भौतिक उपलब्धियों के पीछे उन्मत्त, त्रयताप-संतप्त मानव को चिर-अभिलषित शाश्वत सुख-शांति का सुधापान कराने वाले दिव्य दिग्दर्शक, महान् पथ प्रदर्शक, भूतल- भूषण, पुण्य-प्रभामय पूषण बीसवीं सदी के महान संत प्रात: स्मरणीय अनंत श्री विभूषित
सदगुरू महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की 139 वीं पावन जयंती देश विदेश में बैसाख शुक्ल चतुर्दशी 4 मई को है।
परम पूज्य गुरुदेव महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के त्रय लोक पाद्-पदमों में कोटि कोटि नमन।

प्रात: स्मरणीय पुज्यपाद गुरूदेव प्रवचन के दौरान कहा करते थे कि सदयुक्ति से ईश्वर के दर्शन होते हैं।ईश्वर की ओर मन लगाइए। लगाने का यत्न संतो से जानिए | सद्युक्ति पाकर साधना करते-करते ईश्वर-दर्शन होना ही है। एक बार भी शुरू कर दीजिए, उसका अंत नहीं होगा। महाभय से बचावेगा और उसका थोड़ा अभ्यास भी बड़ा फलदायक होगा। बारंबार मनुष्य शरीर मिलेगा। इस शरीर के जीवनकाल में ही जो मोक्ष पा लेता है तो वही ईश्वर को ठीक-ठीक जानता है।
आध्यात्मिकता की ओर चलिए।
संसार की सँभाल बहुत जरूरी है। संसार में बहुत थोड़ी देर का आराम मिलता है। इस आराम या चैन का सुख क्षणिक है अपूर्ण है। किंतु संसार के बाद का सुख कल्याणपूर्ण और नित्य है। संतों ने कहा है कि संसार के कामों को भी करो और संसार के पार में भी देखने की कोशिश करो।
“पलटू कारज सब करै सुरति रहै अलगान।” – पलटू साहब
इसके लिए यत्न सीखो और अमल (अभ्यास) करो। उस अभ्यास को बढ़ाओ। ऐसी बात नहीं कि संसार का काम करते हुए वह अमल नहीं होगा। संतों ने कहा है कि नैतिकता के पतन से दु:ख पाओगे। सदाचारहीन होने से नैतिक पतन होगा। सदाचार का पालन करो। सदाचार का पालन करना, बिना आध्यात्मिक ज्ञान के नहीं होगा। केवल आधिभौतिक पदार्थों को लेते रहो, तब तुम सदाचारी बनोगे, यह नहीं होगा। संसार का पदार्थ येन-केन विधि से ले सकोगे, किंतु जो रूहानी चीज है, उसको जिस-तिस तरह से नहीं ले सकोगे। दुरुस्त और ठीक एखलाक वा त्रुटि-विहीन सदाचार से ही अध्यात्म-तत्त्व का पाना हो सकता है, जिसमें शांतिदायक सुख है।सदाचार के पालन में लगे रहने से नैतिकता का पतन नहीं होगा और जनता में नैतिकता की बढ़ती से संसार सुखी हो जाएगा। यदि सदाचार से गिरे तो नैतिक पतनवालों को संसार में चैन कहाँ? यह विश्वास मत करो कि केवल भौतिकवाद में ही शान्ति और संतुष्टि मिलेगी, ऐसा कभी नहीं हुआ और न कभी होगा। आध्यात्मिकता की ओर बढ़े और सांसारिक वस्तुओं को भी सँभालते रहो। मैं देखता हूँ कि आजकल देश में नैतिक पतन हो गया है। जो जिस कदर खाने-पहनने पाते हैं, उसी में किसी तरह गुजर करते हैं। किंतु सदाचार का पालन हो, अध्यात्म-ज्ञान हो, तो जिन्हें खाने-पहनने कम मिलते हैं, उन्हें विशेष मिल जायँ।
हमारी सरकार देश को सुखी बनाने के लिए विधान बनाती है, किन्तु उस विधान के रहते हुए भी नैतिक पतन के कारण लोग अन्न और वस्त्र की कमी को अत्यधिक महसूस करते ही हैं। इसलिए नैतिक पतन न हो, इसके लिए सदाचार का पालन कीजिए। इस सदाचार का अवलम्ब ईश्वर की भक्ति है। ईश्वर की भक्ति कीजिए अर्थात् आध्यात्मिकता की ओर चलिए। योग, ज्ञान और ईश्वर भक्ति; सब संग-संग मिले-जुले हुए हैं। बिना ज्ञान के किसकी भक्ति हो, जान नहीं सकते।
सदाचार के पालन से संसार में सुख और परलोक में भी मोक्ष मिलेगा।
सब लोगों को इसका पालन करना चाहिए।सब कोई कुशल से रहिए। आनंद से रहिए । मेल से रहिए ।श्री सद्गुरु महाराज की जय।

