पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाओं ने रखा वट सावित्री व्रत।।
अमृत सागर झा,बलुआ बाजार

प्रखंड क्षेत्र में वट-सावित्री पर्व पर सुहागिनों ने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर पूजा अर्चना किया। इसके लिए व्रती महिलाओं ने सामूहिक रूप से वट वृक्ष की पूजा की। इस दौरान लक्ष्मीनियाँ स्थित ग्रामदेवता स्थान व वार्ड 11 स्थित मंदिर परिसर में पहुंचकर महिलाओं ने सामूहिक रूप से बरगद के पेड़ की पूजा अर्चना की। कई अन्य स्थानों पर भी वट सावित्री का पूजन किया गया। वहीं, प्रखंड क्षेत्र के बलुआ, लक्ष्मीनियाँ व मधुबनी में रविवार सुबह से महिलाओं का मंदिरों में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। महिलाओं ने देवी-देवताओं के दर्शन करने के पश्चात सामूहिक रूप से मंदिर परिसर में वट वृक्ष की पूजा की। पति की लंबी आयु की प्रार्थना की। पंडितों ने विधि विधान से पूजा संपन्न कराई। वहीं प्रखंड क्षेत्र के अन्य जगहों में भी वट-सावित्री पर्व पर सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा।

मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के साथ ही वट वृक्ष की विधि-विधान के साथ पूजा की। शाम को व्रत के समापन के बाद अन्न ग्रहण किया। वट-सावित्री पर्व के चलते क्षेत्र के मंदिरों में खासी रौनक रही। मंदिरों में दोपहर बाद तक महिलाओं के पहुंचने का सिलसिला जारी था।
पहली बार व्रत लेकर खुश थीं। साथ ही वट-सावित्री व्रत के लिए नव विवाहिताओं में भी उत्साह देखने को मिला।हालांकि सुबह से ही हो रहे मूसलाधार बारिश को लेकर बरगद पेड़ के नीचे पीछले वर्ष की भांति इतनी भीड़ देखने को नहीं मिली, बारिश की वजह से ज्यादातर सुहागिन अपने घर में पूजा की।
बरगद के पेड़ में त्रिदेव का होता है निवास इसलिए महिलाएं इसके नीचे करती हैं पूजा।।
पुराणों के अनुसार बरगद के पेड़ में त्रिदेव का निवास है। ब्रह्मा वट के जड़ भाग में, विष्णु तना में और महेश का वास ऊपरी भाग में है। वटवृक्ष पूजन के लिए सुहागिनों ने सोलह शृंगार से सज-धजकर निर्जला व्रत के साथ पूजन सामग्री में सिंदूर, रोली, फूल, धूप, दीप, अक्षत, कुमकुम, रक्षा सूत्र, मिठाई, चना, फल, दूध, बांस के पंखे, नए वस्त्र के साथ एकत्रित होकर विधि-विधान से वटवृक्ष की पूजा की। सावित्री सत्यवान व यमराज के कथा का श्रवण किया। हल्दी में रंगे सूत्र के रूप में कच्चे धागे लेकर बरगद वृक्ष का 7 बार परिक्रमा की और पेड़ में धागे को लपेटते हुए हर परिक्रमा में वृक्ष के जड़ में एक चना चढ़ाई। अपने पति व संतान की दीर्घायु होने की प्रार्थना की। वट वृक्ष की जड़ में दूध और जल भी चढ़ाया। पूजन व कथा श्रवण के बाद सुहागिनों ने एक-दूसरे को सुहाग व शृंगार के सामान भेंट किए। सुहागिनों ने बरगद के कोमल अंकुर को निगलकर व्रत तोड़ी। बाद घरों में आमरस और पूड़ी प्रसाद खाया।

