“विश्व पर्यावरण दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र में किसान गोष्ठी कर फलदार पौधों का किया गया वितरण”
रिपोर्ट- विकास आनन्द के साथ सुरेश कुमार सिंह की रिपोर्ट


आधुनिकता की दौड़ में प्रकति से छेड़छाड़ के कारण विश्व के सभी देश सहित धरती पर हर दिन प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। जिसके दुष्परिणाम समय-समय पर देखने को मिलती है। पर्यावरण में अचानक प्रदूषण का स्तर बढ़ने से तापमान में भी तेजी देखी जा रही है, तो कहीं-कहीं पर प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के कारण लंबे समय से बारिश भी नहीं हो रही है।

ऐसे में लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करने के लिए हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसी कड़ी में भारत सरकार की संस्था सुपौल जिला के राघोपुर स्थित कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा किसानों सहित कई गणमान्यों को फलदार पौधों प्रदान कर पर्यावरण संतुलन के बारे में जानकारी दिया गया। इस मौके पर कई पर्यावरण प्रेमियों ने वृक्षारोपण करने और कराने का संकल्प लिया। पर्यावरण दिवस के मौके पर केवीके प्रांगण में उपस्थित किसानों और गणमान्यों को संबोधित करते हुए वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ मनोज कुमार ने बताया कि मानव जीवन स्वास्थ्य संतुलन हेतु प्रतिदिन कम से कम 350ग्राम फल का आहार का सलाह डॉक्टर दिया करते हैं,लेकिन बिहार प्रदेश में सिर्फ औसतन मात्र 20ग्राम फल का सेवन किया जा रहा है जिससे कि काफी गम्भीर स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न हो रहा है।

इसका मुख्य कारण बिहार प्रदेश में फलदार वृक्षों की मात्रा में भारी कमी बताया जा रहा है और जो भी उच्च क्वालिटी का फल का उत्पादन बिहार में होता है, वो अन्य प्रदेश में बिक्री कर दिया जाता है। बिहार के बहुत से आम आदमी के पास अपने जमीन में फलदार पेड़ भी नही है। इसी कारण भारत सरकार कृषि विभाग के वरीय अधिकारियों के निदेश पर सुपौल जिला के सैकड़ो किसानों और गणमान्यों को फलदार आम के विभिन्न किस्मों का फलदार पौधा दिया गया है। इस मौके किसान नेता परमेश्वर सिंह यादव ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा पूरे बिहार प्रदेश में करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है।भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष सह पूर्व जिला कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार झा ने बताया कि वृक्षारोपण के इस नेक कार्य को सिर्फ विश्व पर्यावरण दिवस ही नहीं बल्कि प्रतिदिन सभी मनुष्यों को जब जिसको समय मिले पौधारोपण करना चाहिए।विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ की और से की गई थी। पर्यावरण दिवस की शुरुआत स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से हुई थी।

इसी दिन यहां पर दुनिया का पहला पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया गया था,जिसमें भारत की ओर से तात्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भाग लिया था। सिमराही पंचायत के पूर्व मुखिया सह भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य बैद्यनाथ प्रसाद भगत ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण और प्रदूषण से हो रहे नुकसान के बारे बताते हुए कहा कि प्रदूषण का बढ़ता स्तर पर्यावरण के साथ ही इंसानों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। इसके कारण कई जीव-जन्तू विलुप्त हो रहे हैं। वहीं इंसान कई प्रकार की गंभीर बिमारियों का शिकार भी हो रहे हैं। सिमराही नगर पंचायत के मुख्य पार्षद प्रतिनिधि विवेक जायसवाल उर्फ शानू ने बताया कि जंगलों को नया जीवन देकर, पेड़-पौधे लगाकर, बारिश के पानी को संरक्षित करके और तालाबों के निर्माण करने से हम पारिस्थिति की तंत्र को फिर से रिस्टोर कर के भी पर्यावरण को बचाया जा सकता है। मौके पर जिले के सबसे प्रगतिशील किसान सम्मान से सम्मानित किसान भिखारी मेहता ने फलदार पौधों को अनुदानित मूल्य पर प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रक्रिया के बारे में बताया।

