चुनाव टलने से उम्मीदवारों की बढ़ी बेचैनी देखी गई निराशा
रिपोर्ट/ब्रजेश कुमार सिमराही राघोपुर
नगर पंचायत सिमराही के मुख्य पार्षद उम्मीदवार बीबी सलीमा खातुन नगर निकाय चुनाव में विलंब से बढ़ेगा अपराध सरकार पर साधा निशाना अतिपिछड़ों का हो रहा है हक मारी
चुनाव टालने से चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को हुआ भारी आर्थिक नुकसान, टूटा युआवों का मनोबल मुख्य पार्षद उम्मीदवार सलीमा खातुन
पूरे प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनाव के रद्द होने पर कहा कि इससे प्रदेश के लाखों युवाओं का मनोबल टूट गया है। इस बार चुनाव में तकरीबन 80% युवा किसी ना किसी तरह शामिल हो रहे थे। उन्होंने आशा थी कि वे इस चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत करेंगे या जनता की सेवा कर अपने नगर पंचायत में बदलाव लाएंगे। उनकी उम्मीदों पर माननीय न्यायालय के निर्णय से पानी फिर गया। बीबी सलीमा खातुन ने कहा कि चुनाव रद्द होने से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को भारी नुकसान हुआ, क्योंकि इस बार अधिकतर ईमानदार युवा और समाजसेवी अपने मेहनत की कमाई और कर्ज लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे, जो सब बर्बाद हो गया। 4- 5 दिनों बाद मतदान होना था और कोर्ट के निर्णय से गहरा सधमा लगा है। उन्होंने कहा कि चुनाव रद्द होने से उन लोग का क्या होगा ? इन्होंने कर्ज लेकर या अपने खेत बेचकर राजनीति में सेवा के संकल्प से आने का फैसला लिया था ऐसे युवा आज क्या करेंगे ? वह रोड पर आ गए. जब यही करना था तो पहले ही हो जाना चाहिए यह सबसे बड़ी बात जिन लोगों ने चुपके से अंतिम दिन अपना नॉमिनेशन कराया था जो समाजसेवी थे, वो पैसा कहां से लाएंगे. चुनाव लेट होने से वे लोग जान चुके हैं कि कौन उनके विपक्ष में खड़े हैं। उनका प्रयास होगा क्यों नहीं किसी तरह दबा दिया जाए कि आगे वह चुनाव में फिर से चुनाव न लग सके।

इसलिए हम बिहार सरकार से अपील करेंगे कि वह जल्द से जल्द चुनाव करवाने का प्रयास करें ताकि बिहार वासियों की उम्मीद पूरी हो सके सिमराही नगर पंचायत के मुख्य पार्षद उम्मीदवार बीबी सलीमा खातुन ने कहा कि नगर निकाय चुनाव को स्थगित करने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया उन्होंने कहा कि यह उनके हक के साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी है अति पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटें उसको अनारक्षित सीट बनाकर चुनाव कराना कहां तक सही है ऐसा निर्णय केंद्र सरकार और भाजपा की गहरी साजिश का परिणाम है अगर केंद्र की सरकार ने समय पर जातीय जनगणना करवा कर आवश्यक संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी कर ली होती तो आज ऐसी स्थिति नहीं आती या एक बार फिर साबित हो गया इसके माध्यम से अति पिछड़ों के हक को कुचला जा रहा है सबसे ज्यादा समस्या तो नगर पंचायत का है जहां पर आज तक चुनाव नहीं हुआ पहली बार नगर पंचायत बना है विकास का काम अवरुद्ध है किसी भी तरह का कोई काम नहीं हो रहा है क्योंकि वहां चुनाव नहीं हुआ जब तक वहां चुनाव नहीं होगा विकास का काम रुका रहेगा बहुत सारा सरकारी कार्य / रहता है आखिर वहां की जनता क्या करें जहां नवनिर्मित नगर पंचायत मैं चुनाव नहीं हो सका आखिर वहां की जनता कहां जाएगी इंसाफ मांगने

