सुरेश कुमार सिंह सिमराही सुपौल

राज्यपाल अर्लेकर से मिले प्रो. रवीन्द्र चौधरी, मिथिला के पारंपरिक रीति से सम्मानित कर भेंट की अपनी पुस्तक।
सुपौल। राघोपुर प्रखंड के गणपतगंज निवासी प्रोफेसर डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी बुधवार को राजभवन, पटना में बिहार के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिले। प्रो चौधरी ने सर्वप्रथम राज्यपाल महोदय को मिथिला के पारंपरिक रीति से अंगवस्त्र, पाग एवं मिथिला चित्रकला से सुसज्जित स्मृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया। तत्पश्चात उन्हें अपनी मैथिली पुस्तक ‘समकालीन मैथिली लेखक कोश’ भेंट की। इस पुस्तक में वर्ष 2020 में आए भयंकर महामारी कोरोना काल में जीवित 851 मैथिली साहित्यकारों का समग्र परिचय संग्रहित है। इसमें भारत, नेपाल समेत अन्य देशों में जहां कहीं रहकर मिथिला वासी मैथिली साहित्य का सृजन करने में लगे हैं, उनका परिचय इसमें शामिल है। इनमें 97 लेखक- लेखिकाएं नेपाल के हैं। जिसमें काठमांडू से चौदह, धनुषा (जनकपुर) से एकाबन, सप्तरी से दस, सिरहा से दस, रोतहट से एक, सर्लाही से दो, महोत्तरी से तीन, सुनसरि से एक तथा मोरंग (विराटनगर) से पांच लेखक- लेखिकाओं का परिचय इसमें संग्रहित है। इसके साथ नेपाल के वैसे मैथिली लेखकों का भी परिचय इस पुस्तक में संग्रहित है जो नेपाल से बाहर अन्य देशों में रहकर मैथिली साहित्य सृजन में लगे हैं। इनमें ईनरूवा के प्रयास प्रेमी मैथिल मलेशिया में हैं तथा कल्याणपुर सिरहा निवासी राम अधीन यादव तथा जोगियारा धनुषा निवासी बिंदेश्वर ठाकुर वैदेशिक रोजगारी दोहा कतर देश में सरकारी कंपनी में कार्यरत रहकर मैथिली साहित्य का सृजन कर रहे हैं।
इस पुस्तक में भारतीय मिथिला क्षेत्र के 754 मैथिली साहित्यकारों का परिचय शामिल है। जिनमें सिंगापुर में कार्यरत अंजनी कुमार चौधरी, खुशबू मिश्रा खुशी, युगांडा के केशव भारद्वाज, फिलिपींस के ज्योति कार्तिकेय, यूके के मिथिलेश झा, वंदना कर्ण, सीमा झा, रूस- मास्को के शिशिर कुमार झा, तंजानिया के संजय झा ‘नागदह’ तथा यूक्रेन के सुपर्णा झा का भी परिचय इसमें शामिल है। ये लोग अन्य देश में रहकर भी मैथिली साहित्य सृजन करते हैं।
राज्यपाल अर्लेकर इस महत्वपूर्ण मैथिली पुस्तक के लिए अपनी शुभकामनायें देते प्रोफेसर चौधरी को बधाई दिए।
प्रोफेसर डा चौधरी ने इससे पूर्व पिछले सप्ताह अपनी यह पुस्तक नेपाल के प्रथम पूर्व उपराष्ट्रपति परमानंद झा से काठमाण्डू में मिलकर उन्हें भेंट की थी। तब पूर्व उपराष्ट्रपति श्री झा इस पुस्तक को देखने के बाद अपना उद्गार व्यक्त करते हुए बोले कि मैथिली साहित्य की यह प्रथम पुस्तक है जो नेपाल और भारत के मैथिली साहित्यकारों को जोड़ती है। इससे मैथिली साहित्य दोनों देशों में समृद्ध होगा।
ज्ञातव्य हो कि पिछले माह प्रोफेसर चौधरी को साहित्य और समाज सेवा कार्यों के लिए भारत गौरव सम्मान से नवाजा गया है। इससे पूर्व राष्ट्रीय साहित्य शिरोमणि सम्मान, मिथिला गौरव सम्मान, झारखंड रत्न सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। प्रो डा. रवीन्द्र कुमार चौधरी सम्प्रति झारखंड के जमशेदपुर स्थित घाटशिला कॉलेज में प्राचार्य के पद पर आसीन हैं।

