शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर” शिक्षाविद संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह” कार्यक्रम…
समाज शिल्पी है शिक्षक:- ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी
रिपोर्ट/ब्रजेश कुमार सिमराही राघोपुर

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय मधेपुरा के तत्वधान में स्थानीय सुख शान्ति भवन के सभागार में शिक्षक दिवस के अवसर पर नगर के संपूर्ण शिक्षको को एवं ब्रह्माकुमारीज संस्थान के विभिन्न पाठशालाओं के अलौकिक शिक्षककों को भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उदघाटन संस्थान के स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी रंजू दीदी, वरिष्ठ समाजसेवी एव मधेपुरा राजद जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ रागिणी रानी उर्फ डाली दीदी,प्रोफेसर सतीश कुमार जी,शिक्षक रबी कुमार,संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउण्ट आबू राजस्थान से आए हुए ब्रह्माकुमार रामलखन भाईजी,बिजय वर्धन,आलम कुमार, ब्रह्माकुमारी दुर्गा बहन,मौसम बहन,भूपेन्द्र भाई ,ब्रह्माकुमार किशोर भाईजी ,डॉ रामसिंह ,अजय कुमार इत्यादियो ने संगठित रूप में दीप प्रज्वलित करके शुभारंभ किया ।तत्पश्चात आए हुए संपूर्ण शिक्षको को साल ,माला एवं ईश्वरीय सौगात देकर के सम्मानित किया गया।
ब्रह्माकुमारीज संस्थान के स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ,ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी जी ने अपने उदबोधन देते हुए कहा कि समाज को सुधारने के लिए आदर्श शिक्षकों की आवश्यकता है। क्योंकि समाज शिल्पी है। शिक्षक,उन्होंने कहां की आज के बिगड़ती परिस्थितियों को देखते हुए समाज को सुधारने की बहुत आवश्यकता है । वर्तमान के छात्र भावी समाज है ।अगर भावी समाज को आदर्श बनाना चाहते हो तो छात्राओं को भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक आचरण के ऊपर भी उनके ध्यान देने की आवश्यकता है ।उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है।जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरों को शिक्षा देता है। धारणाओं से विद्यार्थियों में बल भरता है। उन्होंने कहा कि जीवन की धारणाओं से वाणी, कर्म व्यवहार और व्यक्तित्व में निखार आ जाता है ।दीदी जी ने कहा कि शिक्षा देने के बाद भी अगर बच्चे बिगड़ रहे है। तो उसका मतलब मूर्तिकार में भी कुछ कमी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अंदर के जो संस्कार है उनका विद्यार्थी अनुकरण करते हैं। शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मार्गदर्शक देने वाला शिक्षक बनना है ।उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है। शिक्षा में भौतिक सुधार तो है लेकिन नैतिकता का ह्रास होता जा रहा है ।उन्होंने बताया कि अपने जीवन की धारणाओं के आधार से नैतिक पाठ भी अवश्य बढ़ाएं ।दीदी जी ने कहा कि शिक्षकों के हाव-भाव ,उठना ,बोलना, चलना ,व्यवहार करना, इन सब बातों का असर बच्चों के जीवन में पड़ता है ।उन्होंने कहा कि अब समाज को शिक्षित करने व शिक्षा देने के स्वरूप को बदलने की आवश्यकता है ।स्वयं के आचरण से शिक्षा देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि समाज को सुधारने की अहम भूमिका शिक्षकों का होता हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी एवं मधेपुरा राजद जिला अध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ ) रागिनी रानी उर्फ डॉली दीदी ने अपने उदबोधन देते हुए कहा कि आदर्श शिक्षक ही आदर्श समाज की निर्मित कर सकता है। आज समाज को सही दिशा देने वाला शिक्षक ही होता है ।शिक्षकों की जिम्मेदारी महान है। उन्होंने कहा कि मूल्य शिक्षा से सामाजिक,मानसिक,राष्ट्रीय ,अंतरराष्ट्रीय,पारिवारिक , समस्याऐं उत्पन्न होती है ।उन्होंने कहा कि वर्तमान में युवा पीढ़ी को नई दिशा देकर समाज व देश में रचनात्मक क्रांति लाने का कर्तव्य शिक्षकों का काम है। उन्होंने कहा कि जग का अंधेरा समाप्त करने के लिए शिक्षकों को जीवन भर में स्वयं भी विद्यार्थी बनकर सीखना होगा। जो जितना अध्ययन करता है।उनका उतना ही अज्ञानता दूर होता है। उन्होंने कहा कि सीखने और सिखाने की कोई उम्र नहीं होती है ।जीवन में सद्गुणों के विकास हेतु सीखने की आदत डालनी चाहिए । ब्रह्माकुमारीज के द्वारा की गई शिक्षकों को सम्मान का कार्यों के लिए संस्थान को सराहना किया।

पार्वती साइंस कालेज के प्रोफेसर (शिक्षक )अजय कुमार जी ने अपने उदबोधन देते हुए कहा कि भारत में शिक्षक दिवस को हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है। इस तारीख के पीछे विशेष कारण है। इस दिन सन 1988 को स्वतंत्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधा कृष्ण का जन्म हुआ था। वह दूसरे राष्ट्रपति होने के अलावा पहले उपराष्ट्रपति, एक दार्शनिक, प्रसिद्ध विद्वान ,भारत रत्न प्राप्त करता ,भारतीय संस्कृति के संवाहक, शिक्षाविद और हिंदू विचारक थे ।उनका हमेशा से मानना था कि शिक्षा के प्रति सभी को समर्पित रहना चाहिए। निरंतर सीखने की प्रवित्ति बनी रहनी चाहिए। जिस व्यक्ति के पास ज्ञान और कौशल दोनों है। उसके सामने हमेशा कोई न कोई मार्ग खुला रहता है। डॉक्टर राधाकृष्ण के विचार आज के युग में भी काफी प्रासंगिक है। डॉक्टर राधाकृष्ण ने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को भारतीय दर्शन से प्रचलित करवाया। वह भारतीय संस्कृति के प्रख्यात शिक्षाविद महान दार्शनिक और एक आस्थावान हिंदू विचारक थे। अपने इन्हीं महान गुणों के कारण भारत सरकार ने उन्हें 1954 में भारत रत्न से नवाजा। जिसके बाद वह भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति बने। साथ में विभिन्न प्रधानाचार्य डायरेक्टर एवं शिक्षकों ने भी अपना विचार रखें ।

उक्त कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमार किशोर भाई जी ने किया। मौके पर राजयोगिनी रंजू दीदी, वरिष्ठ समाजसेवी एव मधेपुरा राजद जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ रागिणी रानी उर्फ डाली दीदी,प्रोफेसर सतीश कुमार जी,शिक्षक रबी कुमार,संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउण्ट आबू राजस्थान से आए हुए ब्रह्माकुमार रामलखन भाईजी,बिजय वर्धन,आलम कुमार, ब्रह्माकुमारी दुर्गा बहन ,मौसम बहन,रबीना बहन,महेन्द्र रजक, भूपेन्द्रभाई ,ब्रह्माकुमार किशोर भाईजी , विजय बर्धन, ओम प्रकाश भाई,बन्दना दीदी,किरण देवी, बिभा देवी, डॉ रामसिंह, अजय कुमार, इत्यादि सैकड़ों शिक्षक ओर श्रद्धालु उपस्थित थे।

