राघोपुर प्रखंड के बाल विकास परियोजना कार्यालय कुव्यबस्था का शिकार ।
रिपोर्ट/ब्रजेश कुमार सिमराही राघोपुर
राघोपुर :प्रखंड क्षेत्र के राघोपुर बालविकास परियोजना कार्यालय कुव्यबस्था का शिकार है। कार्यालय का प्रभार प्रमोटेड सीडीपीओ के हवाले हैं, कार्यालय में लिपिक से लेकर आदेश पाल तक के पद रिक्त पड़े हैं। स्कूल पूर्व शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों की पोशाक राशि की सूची महीनों से कार्यालय में धूल फांक रही है। कन्या सुरक्षा योजना सहित अन्य कई योजनाओं में राघोपुर परियोजना निचले पायदान पर है।

कोई भी कार्य समय से सम्पन्न नही हो रहा है।इधर प्रखंड क्षेत्र में कार्यरत महिला पर्यवेक्षिका जिसके बदौलत आंगनवाड़ी सेंटर की स्थिति कुछ हद तक ठीक रह पाती उसे भी सेक्टर चेंज कर स्थिति वद से बत्तर कर दिया है। बार बार सेक्टर चेंज का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। गौरतलब हो कि 30 मार्च से अभी तक बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सुलेखा कुमारी ने तीन बार महिला पर्यवेक्षिका का सेक्टर चेंज किया है। जिससे कार्य करने में महिला पर्यवेक्षिका को जहां असहज महसूस हो रही है वहीं आंगनवाड़ी सेविका को भी पता नही रहता है कि उनके क्षेत्र का एल एस कौन है। यहां तक कि आंगनवाड़ी पोशक क्षेत्र के आम लोग भी एलएस को लेकर दुविधा में पड़ जाते हैं, की वो किसी कार्य को लेकर किस एलएस के पास जायें।
क्यों बदला जा रहा है बार सेक्टर:- सूत्रों की माने तो प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र से सीडीपीओ क्रय पंजी पर काउंटर साइन करने के नाम पर 2000 से 2500 सो रूपैया की उगाही करती है। खबर है कि इस उगाही में जो एलएस सीडीपीओ को साथ नही देती उसे सेक्टर चेंज कर तंग किया जाता है।जिससे आईसीडीएस निदेशालय द्वारा संचालित योजना सही रूप से लाभुक तक नही पहुंच पाता है।
कब कब बदला गया सेक्टर:- राघोपुर बालविकास परियोजना में कार्यरत सेविका के सेक्टर चेंज को लेकर जारी पत्र के अबलोकन पर गौर करें तो 30 मार्च 2022 को जारी पत्र में एलएस नूतन कुमारी को सेक्टर 1और 4 दिया गया, वहीं एलएस रंजू कुमारी सेक्टर 2और आठ एलॉट हुआ जबकि ललिता कुमारी को 6,7 सेक्टर का प्रभार दिया गया।इस कड़ी में नीलम कुमारी को 3 एवं प्रभा कुमारी को सेक्टर 5 का आदेश प्रदान कर निर्देश दिया गया कि सभी एलएस अपने अपने सेक्टर अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण एवं आईसीडीएस निदेशालय के अनुरूप कार्य का संचालन कराकर अविश्रव कार्यालय में जमा करावे । पत्र के आलोक में कार्यरत एलएस भी अपने अपने सेक्टर में कार्य करने लगी।लेकिन अचानक महज 12 दिन बाद 12 अप्रेल 2022 को प्रभारी सीडीपीओ ने पुनः सेक्टर चेंज को लेकर दूसरा पत्र जारी कर दिया जिसमें एलएस नूतन कुमारी को सेक्टर 1,एवं 4 के प्रभार से मुक्त कर सेक्टर 5 का प्रभार दे दिया। वहीं एल एस रंजू के प्रभार में कोई फेर बदल नही किया गया।जबकि ललिता कुमारी के सेक्टर 6एवं 4 के बदले 6और 7 दे दिया। इसी तरह एलएस नीलम कुमारी के सेक्टर 3 को बदलकर उनके जिम्मे सेक्टर 7 एवं 1 का प्रभार दिया।वहीं इस बार प्रभा कुमारी को सेक्टर 5 से हटाकर सेक्टर 3 दे दिया।सीडीपीओ के इस कारनामे से एलएस ,सेविका,सहायिका, से लेकर आमलोगो मे आक्रोश व्याप्त है।लोगो का कहना है कि आखिर किस परिस्थिति में सीडीपीओ द्वारा 12 दिनों के अंदर सेक्टर चेंज कर एलएस को इधर से उधर कर दिया। इससे आंगनवाड़ी केंद्रों एवं आम लोगो को क्या फायदा मिलेगा। हैरत की बात ये है कि यह मामला अभी ठंढा भी नही हुआ था कि एक बार सीडीपीओ सुलेखा कुमारी ने 17 अगस्त 2022 को कार्यालय पत्रांक 408 के माध्यम से सभी एल एस का सेक्टर चेंज कर दिया। जिससे एलएस में सीडीपीओ के प्रति काफी नाराजगी व्याप्त है। अपने दिए बयान में एलएस ने कहा कि माह के बीच मे सेक्टर चेंज कर हमलोगों को तंग किया जा रहा है। कहा कि इस तरह के तुगलकी फरमान से सेविका का एवसेंटी , केंद्र से रिलेटेड कई प्रकार के अविश्रव देने में कठनाई महसूस हो रही है।
क्या कहते हैं सेविका:- बार बार एलएस को इधर से उधर करने के मामले में प्रखंड के सेविका रंजू कुमारी, ललिता कुमारी, प्रीति कुमारी आदि ने कहा कि आईसीडीएस निदेशालय अनुसार केंद्र से सम्बंधित डाटा ट्रेकर एप पर लॉड किया जाता है, जिसमे महिला पर्यवेक्षिका का बड़ा योगदान होता है ।इधर परियोजना पदाधिकारी द्वारा महिला पर्यवेक्षिका को इधर से उधर सेक्टर बदलने से वे पोशण ट्रेकर पर सही सलामत कार्य नही कर पा रहे हैं। जिससे जिला में राघोपुर परियोजना की स्थिति निचले पोदान पर है। हंलांकि सीडीपीओ के इस बार के तुगलकी फरमान का एल एस बिरोध कर रही है। एल एस का कहना है कि सेक्टर हिं चेंज करना है तो सीडीपीओ किसी भी महीना के एक तारिक को करें ताकि महिला पर्यवेक्षिका सेविका ,सहायिका का महीना भर का एवसेंटी जमा कर पाएं।
कहते हैं सीडीपीओ:- महिला पर्यवेक्षिका अविश्रव जमा करने में लेट लगा देती है। जिसके चलते महीना के बीच मे हिं सेक्टर चेंज करना पड़े।

