“नहीं मिल रहा है खाद, कैसे आएगा धान में स्वाद’
रिपोर्ट:- ब्रजेश कुमार के साथ सुरेश कुमार सिंह सिमराही राघोपुर
★सुपौल जिले के किसानों को करना पड़ रहा है खाद की किल्लत का सामना
राघोपुर :विपरीत परिस्थितियों को झेलने के बावजूद भी जिले के किसानों ने इस साल के खरीफ सीजन में व्यापक पैमाने पर धान की खेती की है।लेकिन धान में पटवन के समय मे सबसे ज्यादे आवश्यक यूरिया खाद का होता है जो कि जिले के अमूमन सभी बिक्री केन्द्र से गायब हो गया है। गद्दी निवासी किसान मित्तन यादव,दौलतपुर के सन्तोष चौधरी,भपटियाही के सुभाष यादव,बैरदह के रोहित सिंह, रामनगर के काशीनाथ पाण्डेय सहित कई किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से यूरिया खाद के लिए खाद दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन किसी भी दुकान में यूरिया खाद नहीं मिल रहा है।

किसान नेता परमेश्वर सिंह यादव ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में यूरिया खाद की ऐसी किल्लत नही देखा है। बाजार से यूरिया खाद नही मिलने के सम्बंध में जानकारी लेने पर मालूम किया गया तो पता चला कि विभाग द्वारा अब तक आपूर्तित यूरिया का खपत जूट की खेती में किया जा चुका है। लेकिन जानकारी अनुसार सुपौल जिले में खाद का आवंटन सिर्फ धान के आच्छादन के मुताबिक किया गया है।ज्ञात हो कि सुपौल जिले में इस वर्ष करीब 30 हजार हेक्टेयर में जूट की खेती व्यापक पैमाने पर की गई है।फिलहाल जिले में धान की रोपाई जीरो शोर से की जा रही है।
★विभागीय रवैये और यूरिया अनुपलब्धता से तंग है जिले के खाद बिक्रेता
अभी के इस यूरिया किल्लत के समय जिस उर्वरक बिक्रेता के यहाँ यूरिया की गाड़ी पहुँचती है, उसके यहाँ कृषि विभागीय टीम भी पहुँच जाती है और अपने निगरानी में यूरिया का वितरण करवा रही है। जिस किसान को यूरिया नही मिल पाता है,वे विभागीय हेल्पलाइन नम्बर पर फ़ोन कर उक्त बिक्रेता की शिकायत करते हैं और विभाग के अधिकारियों द्वारा बिक्रेता के यहाँ कोई न कोई अनियमितता ढूँढ़ कर कार्यवाही कर दिया करते हैं। रही सही कसर विभाग के टॉप20 क्रेताओं की जाँच में में बिक्रेता का नाम आने पर भरपूर दोहन शोषण का शिकार होना पड़ता है। इसी कारण खाद बिक्रेता खाद का बिक्री करने से पीछे जा रहे हैं।
★बिक्रेताओ को खाद खरीदने और बेचने में हो रही है व्याहारिक परेशानी
जिले के खुदरा खाद बिक्रेता का कहना है कि उन्हें थोक बिक्रेता के द्वारा रेक पॉइन्ट से खाद दिया जाता है और ट्रक भाड़ा,लेबर लोड अनलोड सहित सभी प्रकार के टैक्स का भुगतान उन्हें खुद से करना पड़ता है। इसी कारण से खाद का रेट निर्धारित मूल्य से ज्यादे पड़ जाता है और उसका खामियाजा खुदरा दुकानदार को पड़ता है। इस बाबत जिले के थोक बिक्रेता विनय कुमार ने बताया कि उर्वरक कंपनी द्वारा रेक पॉइंट से ही खाद दिया जाता है और रेक पॉइंट से ही इनवॉइस किया जाता है। चूंकि सुपौल जिले में रेक पॉइंट नही है,इसलिए अन्य जिले के रेक पॉइन्ट से उर्वरक की आपूर्ति होती है और जो ट्रक भाड़ा खुदरा बिक्रेता के दुकान तक खाद पहुँचने में वास्तविक भाड़ालगता है, उतना भाड़ा कम्पनी से प्राप्त नही होती है। इसी कारण से सुपौल जिला में खाद निर्धारित दर पर बेचने में परेशानी हो रही है।

