सौहार्दपूर्ण माहौल में मना शांति,भाईचारा और समानता का पर्व बक़रीद, आपसी भाईचारे दिखा सिमराही नगर पंचायत में।
सुरेश कुमार सिंह के साथ बिकाश आनन्द।
पिछले कई दिनों से बाज़ार में खरीदारों की भीड़ भाड़ पर आज लगाम लगा, आज सभी भीड़ सुबह से नजदीकी मस्जिदों में दिखी और हिंदू धर्म के लोगों को अपने नजदीकी क़रीबी मुसलमान को बधाई और उनके दाबत में शामिल होते देखा गया। जी, यही नजारा सिमराही नगर पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में दिखा। युवा समाजसेवी आफ़ताब आलम ने बताया कि इस्लाम धर्म को मानने वालों के दो अति महत्वपूर्ण त्योहार हैं, एक ईद-उल-फितर, जो रोजा पूरा होने पर मनाया जाता है, और दूसरा ईद-उल-अज़हा, जो आखिरी महीने के दसवें दिन मनाया जाता है। इस्लामिक महीना अदा किया जाता है, जिसका संदेश शांति, भाईचारा, समानता है और दूसरा कुर्बानी एक जानवर की कुर्बानी है, इस मौके पर हमें हजरत इब्राहिम की जिंदगी के बारे में जानना चाहिए। उनकी जीवन मे प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण, उन्हें अपने जीवन में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।ये बातें जामीअतुल -कासिम दारुल उलूम अल-इस्लामिया के उपाध्यक्ष मुफ्ती मुहम्मद अंसार कासमी ने कही। उन्होंने नमाज से पहले लोगों से कहा कि आपको यह जान लेना चाहिए कि आपकी कुर्बानी का मांस अल्लाह तक नहीं पहुंचता, बल्कि आपकी नियत और तकवा पहुंचता है अपने हृदय का भय देखो, केवल पशुओं की ही बलि न चढ़ाओ, परन्तु अपनी भी बलि चढ़ाओ, और अपने हृदय को गन्दी बीमारियों और बुरे संस्कारों से शुद्ध रखो।

सामाजिक कार्यकर्ता नूर आलम ने कहा कि ईद त्योहार प्यार का संदेश देता है, यह त्योहार भाईचारे का भी संदेश देता है कि हमें अपनी खुशियों में दूसरों को भी शामिल करना चाहिए। आपसी भाईचारे के इस पर्व के मौके पर मो आफ़ताब, नूर आलम, मो शाहनवाज फुरकान, मो तौसीफ, अब्दुल मन्नान, राजू जियाउल चंद साहब सहित सैकड़ो मुसलमान धर्म प्रेमियों ने आपसी भाईचारा को मजबूत बनाने का संकल्प लिया और अन्य को भी प्रेरित करते दिखे।

